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    डोनाल्ड ट्रंप के चेले नवारो ने फिर उगला जहर, मोदी-पुतिन-जिनपिंग की एकता पर दिया बड़ा बयान

    न्यूयॉर्क/वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रमुख व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने भारत, रूस और चीन के नेताओं के बीच दिखी एकता को ‘परेशान करने वाला’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रूस के बजाय अमेरिका, यूरोप और यूक्रेन के साथ होना चाहिए। यह बयान शंघाई सहयोग संगठन यानी कि SCO शिखर सम्मेलन में सोमवार को त्येनजिन, चीन में मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच दिखी दोस्ती के बाद आया है।

    यह बहुत परेशान करने वाला है’

    नवारो ने व्हाइट हाउस में कहा, ‘यह बहुत परेशान करने वाला है। यह शर्मनाक है कि दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था के नेता मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग जैसे दो बड़े तानाशाह नेताओं के साथ नजदीकी दिखा रहे हैं। यह समझ से बाहर है।’ उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब भारत और अमेरिका के बीच संबंध पिछले 2 दशकों में सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं। ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 25% पारस्परिक टैरिफ और रूसी तेल खरीदने के लिए अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लगाया है, जिससे भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ लागू हो गया है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है। भारत ने इन टैरिफ को ‘अनुचित और अतार्किक’ बताया है।

    ‘समझ नहीं आता कि मोदी क्या सोच रहे’

    नवारो ने कहा, ‘मुझे समझ नहीं आता कि मोदी क्या सोच रहे हैं, खासकर तब जब भारत और चीन के बीच दशकों से तनाव रहा है, और कभी-कभी मामला जंग तक पहुंच गया है। हम उम्मीद करते हैं कि भारतीय नेता समझेंगे कि उन्हें रूस के बजाय अमेरिका, यूरोप और यूक्रेन के साथ होना चाहिए। उन्हें रूसी तेल खरीदना बंद करना होगा।’ भारत ने रूसी तेल खरीदने के अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि वहा ऐसा राष्ट्रीय हित और मार्केट डानैमिक्स को देखते हुए कर रहा है। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पश्चिमी देशों ने रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाए है, जिसके बाद रूस भारत का सबसे बड़ा एनर्जी सप्लायर बन गया है।

    पीएम मोदी, शी और जिनपिंग की केमिस्ट्री

    त्येनजिन में हुए SCO शिखर सम्मेलन में मोदी, पुतिन और शी ने गर्मजोशी से मुलाकात की। तस्वीरों में तीनों नेता एक-दूसरे से हाथ मिलाते, गले मिलते और हंसते हुए दिखे। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई, जब ट्रंप की टैरिफ नीति और भारत पर उनकी आलोचनाओं ने दोनों देशों के रिश्तों में खटास पैदा की है। विश्लेषकों का कहना है कि यह एकजुटता वैश्विक मंच पर अमेरिका के दबदबे के खिलाफ एक वैकल्पिक व्यवस्था को दिखाती है।

    नवारो की आलोचना और भारत का रुख

    नवारो ने भारत को ‘टैरिफ का महाराजा’ कहकर तंज कसा और दावा किया कि भारत सबसे ज्यादा टैरिफ लगाता है और इसे स्वीकार नहीं करता। उन्होंने कहा, ‘वे हमें अपने यहां सामान बेचने नहीं देते, इससे अमेरिकी मजदूरों और टैक्सपेयर्स को नुकसान होता है।’ साथ ही, उन्होंने भारत के ब्राह्मण समुदाय पर निशाना साधते हुए कहा, ‘भारतीय लोगों को समझना चाहिए कि ब्राह्मण उनके हितों के खिलाफ मुनाफाखोरी कर रहे हैं।’ वहीं, भारत ने साफ किया कि वह रूसी तेल खरीदना जारी रखेगा, क्योंकि यह उसके 1.4 अरब नागरिकों के लिए ‘सबसे अच्छा सौदा’ है।

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