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    मीडिया के माध्यम से पीड़ित महिला ने पैतृक संपत्ति और बेटियों के हक के लिए लगाई इंसाफ की गुहार

    लोनी, गाजियाबाद
    प्रार्थिनी पूजा, निवासी आशाराम एन्कलेव, उत्तरांचल कॉलोनी, लोनी, गाजियाबाद ने अपनी सास, पति और अन्य के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए एसीपी इंद्रापुरी से न्याय की मांग की है। प्रार्थिनी का कहना है कि उनकी सास कुसुम देवी और पति संदीप ने मिलकर प्रार्थिनी और उसकी दो बेटियों प्रियांशी (5 वर्ष) और मानवी (1 वर्ष) को पैतृक संपत्ति से वंचित करने के लिए साजिश रची है।

    प्रार्थिनी का आरोप है कि उनकी सास ने पैतृक मकान, जो उनकी दादी सास स्वर्गीय सोना देवी के नाम था, को फर्जी तरीके से सविता रानी कर नामक महिला को बेच दिया। यह मकान प्रार्थिनी और उनकी बेटियों का पैतृक हक था। सास और पति ने प्रार्थिनी को इस साजिश की भनक तक नहीं लगने दी और मकान का बैनामा 24 अक्टूबर 2024 को करा दिया।

    दूसरी शादी और धमकियों के आरोप

    प्रार्थिनी ने यह भी आरोप लगाया है कि उनकी सास ने उनके पति की दूसरी शादी करा दी है। स्थानीय पुलिस भी प्रार्थिनी से उनके पति के बारे में जानकारी मांग रही है, जिससे प्रार्थिनी और अधिक परेशान हो रही है।

    अवैध कब्जा खाली कराने का दबाव

    सविता रानी कर और उनके पुत्र प्रकाश कुमार कर पर प्रार्थिनी ने आरोप लगाया है कि वे एसआई अंकुश तोमर और सूरज नागर के साथ मिलकर प्रार्थिनी को मकान खाली करने के लिए धमका रहे हैं।

    मानवता की अपील

    प्रार्थिनी ने एसीपी इंद्रापुरी से मांग की है कि उनकी सास, पति, सविता रानी कर और उनके बेटे के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही, प्रार्थिनी और उनकी बेटियों को उनका जायज हक दिलाया जाए और जान-माल की सुरक्षा प्रदान की जाए।

    पूरी घटना ने गरीब प्रार्थिनी और उनकी बेटियों के भविष्य पर संकट खड़ा कर दिया है।

    क्या है पूरा मामला

    “लोनी, गाजियाबाद की एक गरीब महिला पूजा और उनकी दो बेटियां आज अपने जायज हक के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। दोस्तों, यह कहानी सिर्फ एक महिला की नहीं है, बल्कि समाज में महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचारों की एक और कड़ी है।

    पूजा, जो कि गाजियाबाद के आशाराम एन्कलेव की रहने वाली हैं, ने अपनी सास और पति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनकी सास कुसुम देवी और पति संदीप ने साजिश रचकर पैतृक मकान को फर्जी तरीके से बेच दिया। यह वही मकान है, जो पूजा और उनकी बेटियों का पैतृक हक था।

    पूजा ने बताया कि उनके ससुर की मृत्यु के बाद सास ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया। बेटा न होने का ताना मारते हुए सास और पति ने उन्हें हिंसा का शिकार बनाया। लेकिन पूजा ने अपने बच्चों के भविष्य के लिए सब सहा। और जब बात पैतृक संपत्ति की आई, तो सास और पति ने चुपके से मकान को बेचकर उन्हें बेघर करने की साजिश रच डाली।

    और ये यहीं नहीं रुका। पूजा की सास ने उनके पति की दूसरी शादी भी करवा दी। इसके बाद सविता रानी कर नाम की महिला और उनके बेटे प्रकाश कुमार कर, पुलिसकर्मियों की मदद से पूजा पर मकान खाली करने का दबाव बना रहे हैं। धमकियां दी जा रही हैं, डराया जा रहा है।

    अब सवाल ये उठता है कि आखिर एक महिला और उसकी मासूम बेटियों को उनका हक कब मिलेगा? पूजा का साफ कहना है कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला, तो उनके और उनकी बेटियों का भविष्य अंधकार में चला जाएगा।

    दोस्तों, यह सिर्फ पूजा की लड़ाई नहीं है, यह लड़ाई हर उस महिला की है, जिसे उसके हक से वंचित किया जा रहा है। समाज के हर व्यक्ति को आगे आकर ऐसे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठानी होगी।

    तो आइए, पूजा और उनकी बेटियों के लिए न्याय की मांग करें।

     

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