नई दिल्ली, 31 मई 2025 — भारत के नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने शुक्रवार को जानकारी दी कि इंडिगो एयरलाइंस के वर्तमान डैम्प लीज़ (Damp Lease) समझौते को 31 अगस्त 2025 तक समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।
क्या होता है डैम्प लीज़?
डैम्प लीज़ एक ऐसी व्यवस्था होती है जिसमें कोई एयरलाइन किसी अन्य विमानन कंपनी से केवल विमान (aircraft) को किराए पर लेती है, लेकिन साथ में क्रू मेंबर (पायलट और केबिन स्टाफ) शामिल नहीं होते। यानी विमान एक कंपनी का होता है, लेकिन उसे उड़ाने वाले पायलट और स्टाफ लीज़ लेने वाली कंपनी के होते हैं।
इंडिगो ने क्यों किया था डैम्प लीज़ का उपयोग?
पिछले कुछ समय से इंडिगो एयरलाइन ने अपनी उड़ानों की संख्या बढ़ाने और संचालन में लचीलापन लाने के लिए डैम्प लीज़ के तहत कुछ विमान शामिल किए थे। इससे कंपनी को अपनी उड़ान सेवाओं को बनाए रखने में मदद मिली थी, खासकर तब जब नए विमानों की डिलीवरी में देरी हो रही थी।
DGCA का हस्तक्षेप क्यों आया?
DGCA की ओर से यह निर्णय विमानन सुरक्षा मानकों, प्रशिक्षण प्रक्रिया, और घरेलू परिचालन नीति के अंतर्गत लिया गया है। नियामक संस्था चाहती है कि भारतीय विमानन कंपनियाँ दीर्घकालीन समाधान की ओर बढ़ें और अत्यधिक डैम्प लीज़ पर निर्भर न रहें।
इस फैसले का असर क्या होगा?
- इंडिगो को अपने डैम्प लीज़ पर लिए गए विमानों को 31 अगस्त 2025 से पहले हटाना पड़ेगा।
- कंपनी को या तो नए विमान खरीदने होंगे या पूरी तरह ऑपरेशनल ‘वेट लीज़’ या ‘ड्राई लीज़’ विकल्पों को अपनाना होगा।
- इससे यात्रियों पर किसी तरह का तत्काल प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन एयरलाइन के परिचालन ढांचे में बदलाव संभव है।
DGCA का उद्देश्य क्या है?
DGCA का मुख्य उद्देश्य है कि भारत की विमानन सेवाएँ सुरक्षित, आत्मनिर्भर और पारदर्शी हों। डैम्प लीज़ जैसे मॉडल केवल अस्थायी समाधान के रूप में देखे जाते हैं, और दीर्घकालिक संचालन के लिए यह उचित नहीं माने जाते।


