भोपाल।
बसंत पंचमी जैसे पावन और सांस्कृतिक महत्व से जुड़े अवसर पर भोपाल में ऐसा आयोजन देखने को मिला, जिसने संगठन की शक्ति, सामाजिक सरोकार और सामूहिक चेतना को एक मंच पर ला खड़ा किया। जनरल एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन (GEWA) का स्थापना दिवस इस बार केवल औपचारिक समारोह नहीं रहा, बल्कि यह समाज, सेवा और संगठन की दिशा तय करने वाला एक प्रेरणादायी आयोजन बनकर उभरा।
GEWA टीम भोपाल और LHO टीम के संयुक्त प्रयासों से आयोजित यह कार्यक्रम पूरे शहर में चर्चा का विषय रहा। उच्च अनुशासन, गरिमामय वातावरण और सांस्कृतिक मूल्यों से सुसज्जित यह आयोजन बसंत पंचमी की भावना के अनुरूप ज्ञान, संवाद और सकारात्मक सोच का प्रतीक बना।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित माननीय विधायक श्री भगवानदास सबनानी ने संगठन की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि कर्मचारी हित और सामाजिक कल्याण के लिए इस प्रकार के संगठनों की भूमिका आज के समय में अत्यंत आवश्यक है। वहीं मध्य प्रदेश शासन के सांस्कृतिक सलाहकार आदरणीय श्री राम तिवारी की विशिष्ट उपस्थिति ने आयोजन को एक अलग ही ऊँचाई प्रदान की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए GEWA के महासचिव आदरणीय श्री सुनील तिवारी ने समाज के समक्ष खड़ी वर्तमान चुनौतियों पर बेबाकी से बात रखी। उन्होंने UGC Act में हुए हालिया परिवर्तनों से उत्पन्न परिस्थितियों को रेखांकित करते हुए कहा कि इन बदलावों का प्रभाव सामान्य समाज और कर्मचारियों पर सीधे पड़ रहा है। उन्होंने समाधान के लिए टकराव नहीं बल्कि संवाद, सहयोग और सामूहिक प्रयासों का मार्ग अपनाने का आह्वान किया।
आयोजन की सफलता में GEWA LHO के अध्यक्ष आदरणीय श्री संदीप चंदक, भोपाल मॉड्यूल टीम के अध्यक्ष श्री प्रविण सिंह तथा उप महासचिव श्री आशीष तिवारी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। इनके कुशल नेतृत्व, सटीक समन्वय और निरंतर सक्रियता के चलते कार्यक्रम न केवल सुव्यवस्थित रहा, बल्कि उपस्थित लोगों के लिए स्मरणीय भी बन गया।
कार्यक्रम में मौजूद संगठन के सदस्यों और शहर के गणमान्य नागरिकों ने इसे सामाजिक एकता, सकारात्मक संवाद और जनसेवा की भावना को मजबूत करने वाला आयोजन बताया। यह स्थापना दिवस आयोजन यह संदेश देने में सफल रहा कि जब संगठन उद्देश्य के साथ खड़ा होता है, तो उसका प्रभाव समाज तक जरूर पहुँचता है।
GEWA का यह आयोजन आने वाले समय में सामाजिक और कर्मचारी हितों से जुड़े मुद्दों पर नई दिशा तय करेगा—ऐसी उम्मीद और विश्वास के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।


